Saturday, January 9, 2016

''ऑल्ट्रेशन मास्टर''
कापते हुए हाथ लेकिन, नज़रे तेज़
कद छोटा लेकिन हौसले आसमान से भी उंचे….
ज़िक्र हो  रहा है चेतक ब्रिज (भोपाल ) के निचे रोज़ाना अपनी दूकान लगाने वाले 75 साल के ''ऑल्ट्रेशन मास्टर'' की, फटी हुई बोरी और बांस की कुछ लकडियो पर चल रहा ये दूकान  रज्ज़ाक दादा (ऑल्ट्रेशन मास्टर ) के कंधो पर टिका है. रोज कॉलेज जाते हुए उन्हें देखती थी और सोचती थी की इस उम्र में लोगों को सहारे की ज़रुरत पड़ती है और ये अपने परिवार का सहारा बन खड़े हुए हैं. अच्छा लगा जब उनसे आज काम के सिलसिले में मिली, बातों बातों में पता लगा की पहले फौजियों के कपडे सिला करते थे और तक़रीबन 50 साल से इसी तरह सुई में धागे डाल कर लोगों के कपडे महज 10-20 रूपए में सील रहे हैं. वैसे मेरे कपडे तो सील गए और मैं यह दावे से कह सकती हूँ हाथों की सफाई और काम की फुर्ती में ये जनाब मनीष मल्होत्रा से काम नहीं। इनकी ज़िंदादिली और जज़्बे को मेरा सलाम..... 

3 comments: